Tuesday, 10 August 2021

नाम बदल/ यू - टर्न सरकार


    पुरस्कार का नाम बदलने से यह सच नहीं छुपाया जा सकता कि मोदी सरकार के द्वारा इस वर्ष खेल बजट में 230.78 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। 

    भारतीय जनता पार्टी एक ऐसी पार्टी जिसके पास जनता को बताने के लिए अपनी सोच व अपनी नीतियों के आधार पर जनहित में किए जाने वाले एक भी कार्य का नाम नहीं है। यही करण है कि आज भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल में शुरू की गई योजनाओं व कार्यों और यहां तक पुरस्कारों का नाम बदलकर उनपर अपना अधिकार जमाने का प्रयास कर रही है। 
    
    क्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा भारतीय खिलाडियों को पूरे विश्व में ख्याति दिलाने वाले मेजर ध्यानचंद के नाम से देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित करने के लिए कोई नया पुरस्कार घोषित नहीं किया जा सकता था? मगर सरकार द्वारा उठाया गया राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलने का यह कदम दर्शाता है कि भारतीय जनता पार्टी के और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन में हमारे देश के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर शहीद होने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री राजीव गांधी के लिए कितनी द्वेष भावना और कुंठा भरी हुई है। 
    
    गौरतलब है कि नाम बदलने या फिर अपनी ही बात से पीछे हटने का कार्य भारतीय जनता पार्टी के द्वारा पहली बार नहीं किया गया है। यही भारतीय जनता पार्टी है जो श्री राजीव गांधी जी द्वारा लाए गए कंप्यूटर का विरोध करती थी मगर आज स्वयं सोशल मीडिया का भरपूर प्रयोग करती है और सब कुछ डिजिटलाइज़ करने की बात करती है। ये वही भारतीय जनता पार्टी है जो किसी दौर में एफडीआई लाए जाने का विरोध करती थी मगर आज अपने कार्यकाल में देश की रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई लेकर आई है। यहां तक कि आज सरकार देश की गरीब जनता तक मुफ्त राशन पहुंचाने के लिए जो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अन्न महोत्सव मना रही है, वो नीति तक देश की जनता को भोजन देने के लिए खाद्य सुरक्षा बिल के रूप में कांग्रेस पार्टी द्वारा ही बनाई गई थी। 

    ऐसे में जब अपनी ही बातों से मुकरने वाली यू-टर्न सरकार ये कहती है कि जनआग्रह पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद पुरस्कार कर दिया गया है तो ये सवाल भी ज़रूरी हो जाता है कि, -  
  • क्या मोदी सरकार 9 महीने से सड़कों पर आंदोलन कर रहे इस देश के अन्नदाता के आग्रह पर काले कृषि कानूनों को रद्द करेगी?
  • क्या मोदी सरकार इस देश के युवाओं को रोजगार देने का अपना वादा पूरा करेगी? 
  • क्या मोदी सरकार महंगाई से परेशान देश की जनता को राहत पहुंचाने का कार्य करेगी?
  • और क्या मोदी सरकार खेल बजट में कटौती करने के लिए इस देश के खिलाड़ियों से माफ़ी मांगेगी? 
    या हमेशा की तरह झूठ बोलकर, देश के दो महानायकों (एक युवा भारत की आधारशिला रखने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व० श्री राजीव गांधी जी और एक अपनी हॉकी के जादू के लिए पहचाने जाने वाले देश के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जी) के बीच दीवार खींचकर देश की जनता को भ्रमित करने का कार्य करेगी। 

Wednesday, 26 May 2021

राम नाम पर बनी सराकार को, रामनामी का डर सताया है...!!

 


 तुम जो इतना अपने धर्म को लेकर चीखते - चिल्लाते फ़िरते थे,

देखो ये क्या हुआ कि,

 तुम्हें तुम्हारे धर्म वाली अंतिम क्रिया भी नसीब न हुई,

और अब ये हो रहा है कि,

 तुम्हारी कब्रों पर तुम्हारे होने की आखिरी निशानी,

वो आखिरी चीज़ जो दुनिया से तुम्हें नसीब हुई,

वो रामनामी भी तुम्हारे ऊपर से हटाई जा रही है,

हुआ है ये कि राम नाम पर बनी सराकार को,

रामनामी का डर सताया है,

रोज़ अखबरों में सरकारी दावों की पोल खोलती,

तुम्हारी कब्रों की छाया है,

ये वही लोग हैं जिन्होंने,

सबको आपस में लड़ाया है...!!

तुम तो चले गए मगर तुम्हारे बाद,

कल को जब वहां मेला लगाया जाएगा,

जश्न मनाया जाएगा,

तो तुम्हारे परिजन उसी रेत पर,

जहां तुम दफ़नाए गए हो,

वहां अपनों के साथ,

खुशियां मनाएंगे,

वो तुम्हें याद तो करेंगे,

मगर तुम कहां दफ़न हो ये भूल जाएंगे!

तुम्हें ज़िन्दा रहकर क्या मिला?

तुम मरकर भी क्या पाओगे?

धर्म में बंटवारे का राग अलापने वाले,

अब कैसे हिन्दुत्व बचाओगे?

यही बेहतर है सबकी खातिर, 

कि अब भी जाग जाओ,

तुम्हें तोड़ने वाली सरकार के,

जाल में न आओ,

सारे भेदभाव छोड़कर,

संकट के समय में एक दूसरे का साथ निभाओ...!!







Tuesday, 10 December 2019

बिटिया रानी

बिटिया रानी



इससे अच्छा है मर जाना तेरा, 
कोख के अन्दर बिटिया रानी, 
हर बार जब तुमने उड़ना चहा, 
इस कुंठित समाज ने भौंहें तानी, 
हर बार जब तुमने चाहा कि, 
तुम करो ज़रा सी मनमानी, 
किसी बेरहम दरिंदे ने फिर, 
नियत दिखाई हैवानी, 
तुम्हें बार - बार छूना चाहा, 
तुम्हें सड़कों पर फिर दौड़ाया, 
आग लगाकर तेरे जिस्म को, 
मिटा दी तेरी सभी निशानी, 
खबर तुम्हारी हुई शहर को, 
पर न जा पाईं तुम पहचानी, 
इससे अच्छा है मर जाना तेरा, 
कोख के अन्दर बिटिया रानी... 
आस्था

Saturday, 5 January 2019

सन्नाटा

सन्नाटा

कभी कभी कितना कुछ कहना होता है,
उन पर्दों से दीवारों से,
उन गुम्बदों से मीनारों से,
पानी के गिलास से,
खिलते मुरझाते गुलाब से,
आंखों के काजल से,
आसमां के बादल से,
मांझी की नाव से,
रेत पर चलते पांव से,
जलते हुए चिराग से,
बुझी हुई खा़क से,
समंदर की गहराई से,
खुद अपनी ही परछाई से,
उसके मासूम इशारों से,
आपस की तकरारों से,
कभी कभी कितना कुछ कहना होता है...
और फ़िर कुछ ऐसा होता है,
हर राज़ दिल में ही रहता है,
तुम कुछ भी नहीं कहते हो,
पर सन्नाटा ये कहता है...
कभी कभी कितना कुछ कहना होता है...
मगर उठती हुई हर आवाज़ को; दिल में ही रहना होता है...

Saturday, 14 July 2018

उसने जाने के लिए सोचा...

वो जानती थी कि जिंदगी आसान नहीं है उसके लिए... और मौत भी मुश्किल होने वाली है...  एक-एक कर सबको दूर करती रही ख़ुद से ताकी उसके बाद किसी को उसके जाने से तकलीफ़ न हो... उसके अपनों को दर्द न हो... इसलिए अकेले दर्द में तड़पना बेहतर समझा... किसी को वक्त नहीं दिया एक बार भी खुद से मिलने का... उसने जाने के लिए सोचा कि बिना ग़म दिए जाना...

Saturday, 21 April 2018

रंगों का कारोबार तेरा...

रंगों का कारोबार तेरा...


 
लखनऊ है तो महज़ गुम्बद-ओ-मीनार नहीं,
सिर्फ़ एक शहर नहीं कूचा-ओ-बाज़ार नहीं,
इसके आँचल में मोहब्बत के फूल खिलते हैं,
इसकी गलियों में फ़रिश्तों के पते मिलते हैं|
 
इस शेर और हमारी तलाश को लखनऊ  की गलियों  में सालों से अपने हुनर और लखनऊ की मशहूर कला रंगरेज़ी का काम करने वाले एक फ़रिश्ते मोहम्मद लतीफ़ ने मुकम्मल किया| बदलते वक्त के साथ सब कुछ तो बदला मगर इंसान की तन ढ़कने की ज़रूरत कभी नहीं बदली| हालांकि इस ज़रूरत पर वक्त के साथ फ़ैशन का चस्का  ज़रूर चढ़ गया| और फ़ैशन  के चस्के के चलते हमें कपड़ों में तरह - बेहतर के रंग देखने को मिले|


एक कपड़े की पहचान हमेशा से उसके रंग से होती आई है जिसका नतीजा  है कि ये रंगों का कारोबार "रंगरेज़ी"  सदियों से चला आ रहा है| बेशक रंगों के कारोबार में बहुत पैसे नहीं हैं, मगर रंगरेज़ों के हौसले भी किसी से कम नहीं हैं|

 
मोहम्मद लतीफ़ का परिवार पिछले 500 सालों से इस कारोबार को आगे बढ़ा रहा  है और अब लखनऊ में रंगरेज़ी का काम करने वाला अाखिरी परिवार बनकर रह गया है| लखनऊ के मौलवीगंज में आज भी लतीफ़ अपनी पुरानी सी दुकान पर कपड़े रंगने का काम करते हैं| वहीं फ़तेहगंंज की गलियों में बने अपने घर में कारखाना भी लगा रखा है|


मोहम्मद लतीफ़ अपने कारखाने  में सिर्फ़ कपड़े रंगते ही नहीं हैं बल्कि कपड़ों में डिज़ाइन बनाने का काम भी करते हैं|  जैसे कि शादी में दुल्हन पर चढ़ने वाली चुनरी "निगोड़ा", इन्द्रधनुष के रंगों रंगी धनक, बसंत के मौसम में पीली साड़ी या दुपट्टा, और सावन में हरे रंग से रंगी  साड़ी या  दुपट्टा| लखनऊ का रंगीन कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर सिला जाने वाला चटपटी लहंगा और घाघरा हमेशा से ही मशहूर रहा है| मगर लतीफ़ के यहां इसको महज़ रंगकर बनाया जाता  है| हमसे बात करते वक्त मोहम्मद लतीफ़ ने रंगरेज़ी, उसके इतिहास और उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ बताया|  इस बातचीत के दौरान कभी उनके चहरे पर गर्व और खुशी का भाव देखने को मिले तो वहीं कभी आने वाले कल की चिंता और दु:ख का भाव देखने को मिला| आइये देखते हैं  उन्होंने हमसे बातचीत के दौरान क्या कहा - 

 
यही सब बाते कम नहीं हैं बल्कि लतीफ़ तो यह भी दावा करते  हैं कि वो अपने रंगों के हुनर से आसमानी बादलों को भी कपड़े पर उतार सकते हैं| मगर धीमे पड़ते इस कारोबार ने उनको भी परेशान कर दिया है| जहाँ रंगरेज़ों को सरकारी मदद भी नहीं मिल पा रही है| वहीं बदलते फ़ैशन के ट्रेंड ने भी इस रंगों के कारोबार पर बुरा असर डाला है|

सूरज से समृद्ध उत्तर प्रदेश!

     बदलते विश्व के संदर्भ में पर्यावरण की रक्षा हम सभी के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है । "पृथ्वी हर आदमी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ...